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शिव जी और पार्वती हिमालय पर्वत पर बैठे थे,
पार्वती ने कहा- नाथ आप एक जगह बैठे-बैठे बोर नही होते.
शिव जी ने कहा – प्रिये खाली नही बैठे है.हम मृत्यु लोक को देख रहे है!
पार्वती- नाथ आप क्या देख रहे है,हमे भी दिखलाइए.
शिव जी- आओ प्रिये तुम भी देखो.
पार्वती जी देखती है मृत्यु लोक में एक जगह बहुत भीड़ जमा थी.बहुत शोर हो रहा था.
पार्वती ने शिव से पूछा-नाथ वहा इतनी भीड़ क्यो जमा है,लोग शोर क्यो मचा रहे है?
शिव जी ने कहा-प्रिये वह मधुशाला है वहा लोग मदिरा पान कर रहे है!मृत्यु लोक का असली सुख मदिरा है.
पार्वती ने कहा-नाथ आज हम मृत्यु लोक की मधुशाला देखना चाहते है?
शिव जी पार्वती को लेकर मृत्यु लोक पहुच जाते है,मधुशाला के बाहर खडे होकर देखने लगते है.पार्वती वहा के लोगों को देखकर हैरान हो जाती है. कहती है नाथ क्या यहा की मदिरा आपकी मदिरा से तेज है, लगता है यहा
की मदिरा में ज्यादा नशा है.देख नही रहे है लोग किस प्रकार एक दूसरे को गलियाँ दे रहे है.किस प्रकार नशे मे झूम रहे है.
शिव जी ने कहा-नही प्रिये हमारी मदिरा इनकी मदिरा से तेज है.
पार्वती ने कहा- नही नाथ यहा की मदिरा में हमे ज्यादा तेज दिख रहा है,क्योकि नाथ आप एक मटकी मदिरा पी जाते है आपको कुछ नही होता,और यहा लोग एक बोतल मे ही गिर जाते है.यहा की मदिरा हमारी मदिरा से तेज लगती है.
शिव और पार्वती आपस में झगड़ रहे थे की मधुशाला (बार)मालिक आ गया,और बोला साहब पीकर देख लो आपके यहा की तेज है की हमारे यहा की तेज है.
शिव जी-गुस्से मे हो गए और बोले तुम्हारे यहा की सारी मदिरा मैं पी जाऊ.
बार मालिक-साहब आप एक ही पीकर दिखा दीजिये सारी की बात छोडीए.
शिव जी गुस्से मे आ गए और बार में जाकर बैठ गए.वेटर को बुला कर पूछा आप के पास क्या-२ है.
वेटर- साहब हमारे पास व्हिस्की है,रम है,जीन है. बताइए आपके लिए क्या लाऊ.
शिव जी बोले-१० बोतल व्हिस्की ले आओ.
वेटर बोला- साहब लेकर जायेगे?
शिव जी बोले- नही मूर्ख हम पियेंगे.
वेटर आश्चर्य में पड़ गया और १० बोतल “व्हिस्की” लाकर टेबल पर रख दीया.
शिव जी बारी-बारी से दासों बोतल पी गए.और वेटर से कहा तुम्हारे पास और क्या है?
वेटर बोला-साहब “रम” है,और “जीन” है.
शिव जी बोले- दस बोतल “रम” लेकर आओ.
वेटर-दस बोतल “रम” लाकर टेबल पर रख देता है.वेटर और आस-पास के सभी लोग शिव जी को देख कर आपस में कह रहे ये आदमी है कि शैतान.
शिव जी – एक-एक करके सारी बोतल पी गए और वेटर से बोले तुम्हारे पास जो सबसे तेज नशा करती है वो लेकर आओ.
बार मालिक और आस-पास खडे सभी के होश उड़ गए.
वेटर- दस बोतल “जीन” ले जाकर टेबल पर रख दीया.
शिव जी- एक-एक करके दासों बोतल “जीन” पी गए और गुस्से मे वेटर से बोले मूर्ख यह मदिरा है या पानी,इसमे कुछ नशा ही नही है. शिव जी गुस्से में खडे हो गए और वेटर से बोले पैसा कहा देना है.वेटर डरते हुए काउंटर की ओर इशारा किया.शिव जी काउंटर की ओर चल दिए,उनके पीछे वेटर यही सोचते हुए जा रहा था की यह आदमी है की शैतान इसे चढ़ती ही नही.वहा खडे सभी लोग शिव जी को घूर रहे थे.
शिव जी- बार मालिक से बताइए तुम्हारा कितना पैसा हुआ.
बार मालिक-शिव जी को देखकर हैरान,और बोला साहब हम आपसे पैसे नही लेगे,आप सिर्फ इतना बता दीजिये आप हो कौन?इतना पीने के बाद भी आप को क्यो नही चढ़ रही है.
शिव जी – मूर्ख तुम सिर्फ अपना पैसा बोलो.
बार मालिक- साहब हमे आप से पैसा नही चाहिऐ सिर्फ आप इतना बता दीजिये आप है कौन?
शिव जी- गुस्से में आ गए और बोले मूर्ख तुम सिर्फ अपने पैसे बताओ.
बार मालिक-हमे आप से पैसे नही चाहिऐ आप हमे सिर्फ इतना बता दीजिये आप हो कौन?
बार मालिक की एक ही रट बार-बार सुन कर शिव जी गुस्सा हो गए और चिल्लाकर बोले बता दूं मैं कौन हूँ?
बार मालिक- हा सर बता दीजिये.
शिव जी जोर से चिल्लाकर बोले- मैं शंकर भगवान हूँ.
पीछे खडा वेटर तपाक से बोला अब चढ़ी साले को!

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